Wednesday, March 17, 2010

betiya


चिड़ि यां,  सी  चहकती , महकते फूल-सी
लगती हौं बेटियां
प्यारी बहुत ही संसार   में
लगती हौं बेटियां।
सातों सुरों  में कूकती, गाती
कोयल-सी बेटिया सातों रंगों को हौं लिए
 तेज किरणों-सी बेटियां।
मां के लिए हौं सुबह  का स्वप्न,
माथे का श्रृंगार बेटियां
बाबुल के लिए जान से भी
प्यारी है, बेटियां।
हंसने से उनके हंसती हौं,
मानों दीवारें घरों की
भइया के सूने हाथ की
राखी हौं बेटियां
पूजा के जलते दीप की
बाती हौं बेटियां
ममता दिखा के सबको
रिझाती हौं बेटियां
रुकते नहीं हौं पैर
पलभर को, जमीं पर
मेहनत की साधी सुगंध
लुटाती हौं बेटियां
गर्मी में ठण्ड की  छांव-सी
लगती हौं बेटियां
सर्दी में मीठी धूप-सी
लगती हौं बेटियां
अविरल बहती  वह धार हौं
गंगा-सी बेटियां
दुनिया-जहां की आग भी
सहती हौं बेटियां
कभी बनीं राधा
कभी दुर्गा भी बन गयीं
दुश्मन के लिए बन गयीं
ये काल बेटियां