Friday, December 30, 2011

betiya


"बचपन की छोड़ चपलता
बेटी हो जाती है जब बड़ी ,
माँ का दिल गबराने लगता है ,
लाड प्यार से पला लाडो को ,
कोई कहे पराया धन,
जब दिल तार-तार हो जाता है,
ये तो है छुइ -मुइ ,
छु न ले कोई इस नाजुक कलि को ,
कही मुरजा न जाय ,
वक्त से पहले ही कही टूट न जाय ,
इस ख्याल से ही, माँ का दिल गबराने लगता है ,
आँखों के सामने अपना वक्त दोड़ने लगता है ,
वो भी थी कभी कलि किसी बाग़ की ,इसकी ही तरह
सपने सजाने चली जाएगी मेरी लाडली ,
रिश्ते की नजाकत को देख ,
माँ का दिल भर आता है ,
है वक्त ठहर जा.. ये यही रुकजा ..
जी लेने दे उसे बचपन अपना ..
बेटिया जब हो जाती है बड़ी माँ का दिल भर आता है |"