Wednesday, October 2, 2013

बेटिया

कितना कुछ सह जाती है बेटिया
अक्सर चुप रह जाती है बेटिया !!

कहाँ तक हिफाजत रखे अपनी -
जब घर में ही बेआबरू हो जाती है बेटिया!

अक्सर चाह कर भी ,नहीं कर पाती कुछ -
अरमानो का गला घौट रह जाती है बेटिया !!

बदल लेती है ,बक्त के साथ खुद को-
हर हाल ढल - जाती है बेटिया !!

क्यों इनका इतना खौप खाते है लोग-
जो कौख में क़त्ल कर दी जाती है बेटिया !!

हरेक कदम पर चुनौती है इनके -
मेहनत से आगे बड जाती है बेटिया !!

बेटी किसी की बहन कभी ,प्रेमिका भी होती
रिश्तो के कितने रंगों में रंग जाती है बेटिया !!


कितना कुछ सह जाती है बेटिया
अक्सर चुप रह जाती है बेटिया !!