Thursday, July 1, 2010


"यह दुनिया की रीत सदा से चली है आई .
बेटी पराया धन , कल किसी और के घर जाई .
.मोह न लगा बाबुल आपनी बेटिया से इतना …
जाई आँगन छोड़ , और कल तुम्हे रुला कर जाई .
तना कहे के ठुठा है जिया देख जाई . .
छोड़ के तुमरे आँगन कही और घर बसाने जाई ..
हंश के विदा किया , आशीर्वाद दीया लाडली को ..
ताकि आगे ऊहर ज़िन्दगी खुसीयू से भर जाई . .!!
और मोह ना लगा बेतिया से इतना तू बाबुल . .
रघुकुल से ही यह रीत है सदा चली आई
बेटी पराया धन , कल किसी और के घर जाई .||"