Thursday, March 29, 2012

बेटियाँ "

बेटियाँ "

देवताओ को घर में बसा लीजिये।

भारती मान को भी बचा लीजिये।

ऐ पुरूष चाहते हो कि कल्याण हो-

बेटियाँ देवियाँ है, दुवा लीजिये।।

माँ,बहन ,संगिनी,मीत है बेटियाँ

दिव्यती ,धारती, प्रीत है बेटियाँ।

देव अराध्य की वंदनाएं है ये-

है ऋचा,मन्त्र है ,गीत है बेटियाँ॥

जग की आशक्ति का द्वार है बेटियाँ।

मानवी गति का विस्तार है बेटियाँ।

जग कलुष नासती ,मुक्ति का सार है-

शक्ति है शान्ति है,प्यार है बेटियाँ

बेटियाँ

सूरज से हैं तेज बेटियाँ,
चाँद की शीतल छाँव बेटियाँ,
झिलमिल तारों सी होती हैं,
दुनिया को सौगात बेटियाँ।

कोयल की संगीत बेटियाँ,
पायल की झंकार बेटियाँ,
सात सुरों की सरगम जैसी,
वीणा की वरदान बेटियाँ।

घर की हैं मुस्कान बेटियाँ,
लक्ष्मी का हैं मान बेटियाँ,
माँ बापू और कुनबे भर की,
सचमुच होती जान बेटियाँ।

दुर्गा इंदिरा लक्ष्मी बाई,
जैसी बनें महान बेटियाँ,
कर्म क्षेत्र में बढ़ने को हैं,
आज सभी तैयार बेटियाँ।

सूरज सी हैं तेज बेटियाँ,
चाँद की शीतल छांव बेटियाँ

बेटियाँ "

बेटियाँ "

शायद पल भर में ही
सयानी हो जाती हैं
बेटियाँ,
घर के अंदर से
दहलीज़ तक कब
आज जाती हैं बेटियाँ

कभी कमसिन, कभी
लक्ष्मी-सी दिखती हैं
बेटियाँ।
पर हर घर की
तकदीर, इक सुंदर
तस्वीर होती हैं
बेटियाँ।

हृदय में लिए उफान,
कई प्रश्न, अनजाने
घर चल देती हैं बेटियाँ,
घर की, ईंट-ईंट पर,
दरवाज़ों की चौखट पर
सदैव दस्तक देती हैं
बेटियाँ।

पर अफ़सोस क्यों सदैव
हम संग रहती नहीं
ये बेटियाँ।

Sunday, January 15, 2012

betiya

"राह देखता तेरी बेटी, जल्दी से तू आना,

किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना,


ना चाहूं मैं धन और वैभव, बस चाहूं मैं तुझको ,

तू ही लक्ष्मी, तू ही शारदा, मिल जाएगी मुझको,


सारी दुनिया है एक गुलशन, तू इसको महकाना,

किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना,


बन कर रहना तू गुड़िया सी, थोड़ा सा इठलाना,

ठुमक-ठुमक कर चलना घर में, पैंजनिया खनकाना,


चेहरा देख के तू शीशे में, कभी-कभी शरमाना,

किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना,


उंगली पकड कर चलना मेरी, कांधे पर चढ़ जाना,

आंचल में छुप जाना मां के, उसका दिल बहलाना,


जनम-जनम से रही ये इच्छा, बेटी तुझको पाना,

किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना।|"

betiya

बिन बेटी ये मन बेकल है, बेटी है तो ही कल है,

बेटी से संसार सुनहरा, बिन बेटी क्या पाओगे?

बेटी नयनों की ज्योति है, सपनों की अंतरज्योति है,

शक्तिस्वरूपा बिन किस देहरी-द्वारे दीप जलाओगे?

शांति-क्रांति-समृद्धि-वृद्धि-श्री सिद्धि सभी कुछ है उनसे,

उनसे नजर चुराओगे तो किसका मान बढ़ाओगे ?

सहगल-रफ़ी-किशोर-मुकेश और मन्ना दा के दीवानों!

बेटी नहीं बचाओगे तो लता कहां से लाओगे ?

सारे खान, जॉन, बच्चन द्वय रजनीकांत, ऋतिक, रनबीर

रानी, सोनाक्षी, विद्या, ऐश्वर्या कहां से लाओगे ?

अब भी जागो, सुर में रागो, भारत मां की संतानों!

बिन बेटी के, बेटे वालों, किससे ब्याह रचाओगे?

बहन न होगी, तिलक न होगा, किसके वीर कहलाओगे?

सिर आंचल की छांह न होगी, मां का दूध लजाओगे।

Wednesday, January 11, 2012

betiya

"जब _जब जनम लेती है बेटी,
खुशिया साथ लाती है बेटी ,
माँ की परछाई पिता का रूप होती है बेटी ,
इश्वर की सोगात होती है बेटी ,
सुबह की पहली किरण है बेटी ,
तारों की शीतल छाया है बेटी ,
त्याग और समर्पण सिखाती है बेटी ,
नए-नए रिश्ते बनाती है बेटी ,
जब सुसराल जाये बड़ा रुलाती है बेटी ,
पर जिस घर जाये उजाला लाती है बेटी ,
बेटी की कीमत उनसे पूछो जिनके पास नहीं है बेटी .........||"

Friday, December 30, 2011

betiya


"बचपन की छोड़ चपलता
बेटी हो जाती है जब बड़ी ,
माँ का दिल गबराने लगता है ,
लाड प्यार से पला लाडो को ,
कोई कहे पराया धन,
जब दिल तार-तार हो जाता है,
ये तो है छुइ -मुइ ,
छु न ले कोई इस नाजुक कलि को ,
कही मुरजा न जाय ,
वक्त से पहले ही कही टूट न जाय ,
इस ख्याल से ही, माँ का दिल गबराने लगता है ,
आँखों के सामने अपना वक्त दोड़ने लगता है ,
वो भी थी कभी कलि किसी बाग़ की ,इसकी ही तरह
सपने सजाने चली जाएगी मेरी लाडली ,
रिश्ते की नजाकत को देख ,
माँ का दिल भर आता है ,
है वक्त ठहर जा.. ये यही रुकजा ..
जी लेने दे उसे बचपन अपना ..
बेटिया जब हो जाती है बड़ी माँ का दिल भर आता है |"

daughter(beti)


"A daughter is a wonderful blessing,
A treasure from above,
She's laughter,warmth and special charm,
she's thoughtfulness and love.

A daughter brings a special joy,
that comes from deep inside,
And as she grows to adulthood,
she fills your heart with pride.

she every that passes,
she's more special than before,
Through every stage, through every age,
You love her even more.

No words can decribe the warm memories,
The pride and gratitude,too.
That comes from having a daughter,
To love and to cherish....just like you."

Wednesday, December 28, 2011

betiya


"कहती बेटी बाह पसार
मुझे चाहिए प्यार,दुलार

बेटी की अनदेखी क्यों
करता है निष्ठुर संसार

सोचो जरा हमारे बिन
बसा सकोगे घर परिवार ?

गर्भ से लेके योवन तक
मुझ पर लटक रही तलवार

मेरी व्यथा , वेदना का
अब हो स्थाई उपचार ||"

Saturday, December 24, 2011

बेटियां


बेटियां कभी किसी की अकेली नहीं होती!
परिवार की मोहल्ले की,समाज की और
सृष्टि की शान होती हैं !
क्योंकि उन्हीं से सृष्टि का
प्रारंभ और अंत होता है !
वह स्वयं से ज्यादा
ओरों के लिए जीती हैं!
वह अपना नहीं ,दूसरों का दिया दर्द सहती हैं !
इसलिए वह हमारी शान होती हैं !

बेटिया


"मुझे माँ से गिला , मिला यही सिला , बेटिया क्यों पराई है
खेली कूदी मै जिस आँगन मे
वो भी अपना पराया सा लागे||


खेली कूदी मै जिस आँगन मे
वो भी अपना पराया सा लागे
एसा दस्तूर क्यों है माँ
जोर किस का चला इस के आगे
एक को घर दिया, एक तो वर दिया
तेरी कैसी खुदाई है||

जो भी माँगा मैंने बाबुल से , दिया हस के मुझे बाबुल ने
प्यार इतना दिया है मुझ को, क्या बयाँ करू अपने मुख से
जिस घर मे पली , उस घर से ही माँ , यह कैसी विदाई है||

अच्छा घर सुंदर वर देखा माँ ने, क्षण मे कर दिया उन के हवाले
जिन्दगी भर का यह है बंधन , कह के समझाते है घर वाले
देते दिल से दुआ, खुश रहना सदा , कैसी प्रीत निभाई है||

मुझे माँ से गिला , मिला यही सिला , बेटिया क्यों पराई है

अब तो जाना पड़ेगा मुझ को, विछोडा सहना पड़ेगा सब से
अब तो जाना पड़ेगा मुझ को, विछोडा सहना पड़ेगा सब से
गलतिय माफ़ करना मेरी, दूर रहना पड़ेगा अब से
अच्छा चलती हु माँ , अब गले से लगा ला
बेटिया तो पराई है माँ , बेटिया तो पराई है माँ
मुझे माँ से गिला , मिला यही सिला , बेटिया क्यों पराई है||"

Friday, December 23, 2011

betiya


मत रोको बिटिया को पढने दो,
मत बाँधो उसे बढने दो,
पत्नी होगी, माँ भी होगी,
उसका जीवन तो गढने दो!

मत खीचों उसे चढने दो,
मत थामो उसे गिरने दो,
आसमानों को छू भी लेगी,
कुछ उसको भी उड लेने दो!

मत टोको उसे हँसने दो,
मत छेडो उसे रोने दो,
सबका तो वो सुन ही लेगी,
कुछ उसको भी कह लेने दो!

betiya


क्यूँ दुनिया ने यह रस्म बनाई है
करके इतना बड़ा कहते हैं, जा बेटी तू पराई है
पहले दिन से ही उसको ये पाठ पढ़ाया जाता है
सजा के लाल जोड़े में दुल्हन बनाया जाता है
छुड़ा देते हैं बेटी से बाबुल का यह घर
क्यूँ दुनिया ने यह ज़ालिम रस्म बनाई है
करके इतना बड़ा कहते हैं जा बेटी तू पराई है .

Thursday, December 22, 2011

betiya


बेटे और बेटी में ,

भेद मत कीजिये |

बेटियों को जीने का

अधिकार आप दीजिये |

इंदिरा और कल्पना की,

उड़ान हमने देखी है |

अब अपनी सायना की

शान अब देखिये |

एक दिन नाम यह

तुम्हारा कर जाएँगी

बस एक बेटी घर में

आंगन मे आने पर

घर एक बगिया बन जाएगी ||

Saturday, December 17, 2011

betiya


"की वोह परियों का रूप होती है …
या कड़कती ठण्ड में सुहानी धुप होती है …
वो होती है उदासी के हर मर्ज़ की दावा की तरह …
या ओस में शीतल हवा की तरह …
वोह चिड़ियों की चेह्चाहाहट है ,
या के निश्छल खिल्किलाहत है …

वोह आँगन में फैला उजाला है ..
या मेरे गुस्से पे लगा ताला है …
वोह पहाड़ की छोटी पे सूरज की किरण है …
या ज़िन्दगी सही जीने का आचरण है …

है वोह ताकत जो छोटे से घर को महल बना दे …
है वोह काफिया जो किसी ग़ज़ल को मुक्कमल कर दे …"

कलयुग की बेटिया .


ओस की एक बूँद सी होती है बेटिया ,
मालिक की दी हुई नेमत है बेटिया ,
फिर जाने जहाँ मैं ऐसा क्यों होता है ,
सारे दुखों का बोझ सिर्फ ढोती है बेटिया ,

जो दे जन्म उसे ,उन्ही से तिरस्कृत है बेटिया ,
अपनों के ही जुल्मो सितम से दबती है बेटिया ,
संसार की नज़रों मैं समझे हीन वो खुद को ,
साडी उम्र घुट - घुट के बिताती है बेटिया ,

पर नए ज़माने की बदलती तस्वीर है बेटिया ,
माँ - बाप के हाथों की अब बदलती तकदीर है बेटिया ,
बेटों की तरह वो भी ,करती है नाम रोशन ,
उज्जवल भविष्य का दीप है ये ... कलयुग की बेटिया ..

Sunday, December 11, 2011

betiya


बेटी बनकर आई हूँ मैं माँबाप के जीवन में
बसेरा होगा कल मेरा किसी और के आँगन में ,

क्यों ये रीत खुदा ने बनाई होगी,
कहते है आज नही तो कल बेटी तू पराई होगी,
देकर जनम पाल पोसकर जिसने हमे बड़ा किया
और एक वक़्त उन्ही हाथों ने हमे विदा किया ,
एक पल को नही सोचते अरे ! हमने ये क्या किया ,
टूट के बिखर जाती है हमारी ज़िन्दगी वहीँ
फिर भी उस बंधन में प्यार मिले ये ज़रूरी तो नही
क्यूँ ये रिश्ता हम बेटियों का अजीब होता है ,
क्या बस यही हम बेटियों का नसीब होता है !!

Friday, November 18, 2011

betiya


लडकियां इतना कैसे लड़ लेती हैं
कैसे अपने लिये हर जगह
जगह बना लेती हैं ??
कैसे जीतना हैं उनको
अपना मिशन बना लेती हैं ??
कैसे कम खाना खा कर भी
सेहत सही रहे ये जान लेती हैं ??

बहुत आसन हैं
जब माँ के पेट मे होती हैं
तभी से सुनती हैं
माँ की हर धड़कन कहती हैं
इश्वर लड़की ना देना
जो कष्ट मैने पाया
वो संतान को पाते ना देख पाउंगी
हे विधाता बेटी ना देना

बस यही सुन सुन कर नौ महीने मे
माँ के खून के साथ
सरवाईवल ऑफ़ द फीटेस्ट
की परिभाषा
को जीती हैं लडकियां

और

जिन्दगी की आने वाली लड़ाई के लिये
अपने को तैयार कर लेती हैं

हर सफल लड़की के पीछे
होती हैं एक माँ की
कामना की
ईश्वर बस बेटी न देना

Sunday, October 23, 2011

betiya


"अगर बेटा वारस है, तो बेटी पारस है |
अगर बेटा वंश है, तो बेटी अंश है
अगर बेटा आन है, तो बेटी शान है
अगर बेटा तन है, तो बेटी मन है
अगर बेटा मान है, तो बेटी गुमान है
अगर बेटा आग है, तो बेटी बाग़ है
अगर बेटा दवा है, तो बेटी दुआ है
अगर बेटा भाग्य है, तो बेटी विधाता है
अगर बेटा शब्द है, तो बेटी अर्थ है
अगर बेटा गीत है, तो बेटी संगीत है ||"

Saturday, October 8, 2011

Pyaari Betiyaan


ओस की एक बूँद सी होती है बेटिया ,

स्पर्श खुरदरा हो तो रोटी है बेटियां ..
रोशन करेगा बेटा तो एक कूल को …
दो - दो कुलों को की लाज होती है बेटियां …
कोई नहीं है एक दुसरे से कम ..
हीरा अगर है बेटा ..
तो सच्चा मोती है बेटियां ..
काँटों की रह पर यह खुद ही चलती है …
औरों के लिए फूल होती है बेटिया . .
विधि का विधान है ..
यही दुनिया की रसम है ..
मुठी भर नीर सी होती है बेटियां

"A father writes about his relationship with daughter'


She's a soft cool rain on a hot summer’s day.
She makes me laugh with the funny things she has to say.

She's the beat of my heart, and the air that I breathe.
She's the sun and the wind, and autumn’s golden leaves.

She's the pride that I feel when I know she's done what’s right.
She's that warm feeling I get, when I remember tucking her in at night.

She is homework and sports, and a busy social life.
She has this beautiful smile that could light the darkest night.

She is the scared feeling I have when she stays out late.
Or the feeling that I am losing her, when she wants to date.

She's the mixed emotions I have, as I watch her mature and grow.
I tell myself she will never leave, but, I know in my heart that someday she will go.

I hope the man that steals her heart, will treat her like a queen.
Because she deserves so much more, than a man that treats her mean.

I will always cherish the wonderful times we have had.
The best part of my life was being her dad.

So now you know who she is, she's my little girl.
I love her with all my heart and I always will.."

Pyaari Betiyaan


"The affection of a father is, daughter,
Sweet melody of a song is, daughter,
Live dream of every passion is, daughter,
A unique gift of universe is, daughter
Dear of dearest face is, daughter,
Don`t pluck these flowers,"

Sunday, October 2, 2011

बेटियाँ तोह सिर्फ इक एहसास होती हैं


"क्या लिखू?
क्या लिखू के वोह परियो का रूप होती हें?
की कड़कती ठण्ड में सुहानी धुप होती हें
वोह अक्षर जो न हो तो वर्णमाला अधूरी हें
वोह जो सब से ज्यादा ज़रूरी हें
यह नहीं कहूँगा के वोह हर वक़्त साथ-साथ होती हें
क्यू के बेटिया तो सिर्फ एक एहसास होती हें ||

क्यू के बेटिया तो सिर्फ एक एहसास होती हें
उसकी आँखे न मुझसे गुडिया मांगती हें
न मांगती हें कोई खिलौना
कब आओगे? बस एक छोटा सा सवाल सलोना ||

जल्दी आऊंगा !
अपनी मज़बूरी को छुपाते देता हूँ मै जवाब
तारीख बताओ समय बताओ ,
वोह उंगलियो पे करने लगती हें हिसाब
और जब में नहीं दे पाता सही सही जवाब
अपने आंसुओ को छुपाने के लिए
वोह चहरे पर रख लेती हें किताब ||

वोह मुझसे विदेश में छुट्टिय
अच्छी गाडियो में घूमना
फाइव स्टार में खाने
नए नए खिलोने नहीं मांगती
न की वोह ढेर सारे पैसे
अपने गुल्लक में उधेलना चाहती हें
वोह तो बस कुछ देर
मेरे साथ खेलना चाहती हें ||

पर वही बात बेटा काम हें
बहुत सारा काम हें
काम करना ज़रूरी हें
नहीं करूँगा तो कैसे चलेगा?
जैसे मज़बूरी हमें दुनिया दारी
के जवाब देने लगती हें ||

और वो झूठा ही सही मुझे एहसास कराती हें
जैसे सब बात वोह समज गयी हो
लेकिन आँखे बंध कर के वो रोंती हें
सपने में खेलते हुए मेरे साथ सोती हें
जिंदगी न जाने क्यू इतनी उलझ जाती हें?
और हम समझते हें की बेटिया सब समझ जाती हें ||"

बेटियाँ तो सिर्फ इक एहसास है … :


क्या लिखूं ?…
की वो परियों का रूप होती है …
या का दक्ती ठण्ड में सुहानी धुप होती है …

वो वोह आँगन में फैला उजाला है ॥ या मेरे गुस्से पे लगा ताला हा इ …
वोह पहाड़ कइ छोटी पे सूरज की रन है …
या ज़िन्दगी सही जीने का आचरण है …
है वोह ताकत जो छोटे से घर को महल बना दे …
है वोह काफिया जो किसी ग़ज़ल को मुक्कमल कर दे …
क्या लिखूं ??…
वोह अक्षर जो न हो तोह वर्ण माला अड़ हो ओरी है …
वोह , जो सबसे जादा ज़रूरी है …
ये नहीं कहूँगा की वोह हर वक़्त साथ - साथ होती है ,

Saturday, April 16, 2011

btiya


"बेटिया होती है जिगर का टुकड़ा ,
हर जगह जनत बनाती है बेटिया
आसमान छुने को तयार बेटिया
हिमालय को छुहा है बेटियों ने
हर जगह छायी है बेटिया||"

Monday, November 1, 2010

betiya


"में बेटी बनकर आई हूँ माँ -बाप के जीवन में


बसेरा है आज कल मेरा किसी और के आँगन में ||



क्यों यह रीत भगवान ने बनायीं होगी

कहते हैं आज नहीं तो कल तू परायी होगी ,||



दे कर जनम पाल -पोसकर जिसने हमें बड़ा किया

और वक़्त आया तो उन्ही हाथों से हमें विदा किया ||



बेटिया इससे समझकर परिभाषा अपने जीवन की

बना देती है अभिलाषा एक अटूट बंधन की ||



क्यों रिश्ता हमारा इतना अजीब होता है

क्या बस यही हम बेटियों का नसीब होता है ||"

betiya


मैने बेटी बन जन्म लीया,



मोहे क्यों जन्म दीया मेरी माँ


जब तू ही अधूरी सी थी!


तो क्यों अधूरी सी एक आह को जन्म दीया,


मै कांच की एक मूरत जो पल भर मै टूट जाये,


मै साफ सा एक पन्ना जिस् पर पल मे धूल नजर आये,


क्यों ऐसे जग मै जनम दीया, मोहे क्यों जनम दीया मेरी माँ,


क्यों उंगली उठे मेरी तरफ ही, क्यों लोग ताने मुझे ही दे


मै जित्ना आगे बढ़ना चाहू क्यों लोग मुझे पिछे खीचे!


क्यों ताने मे सुनती हू माँ,मोहे क्यों जन्म दीया मेरी माँ?

Thursday, July 22, 2010


घर आँगन मे च ह -चाहती है .न प्यारी बेटिया .

चिडियों जैसे इधर - उधर उडती फिरती है .न प्यारी बेटिया .


एक आह के साथ जनम लेती है .न प्यारी बेटिया .,

एक आह देकर ही फिर छोड़ जात्ती है .न प्यारी बेटिया .


बहुत सपने सजाते है .न हर माँ -बाप बेटियों के लिए ,

दुआ करती हूँ सदा खुश रहे सबकी प्यारी बेटिया .

Thursday, July 1, 2010


"यह दुनिया की रीत सदा से चली है आई .
बेटी पराया धन , कल किसी और के घर जाई .
.मोह न लगा बाबुल आपनी बेटिया से इतना …
जाई आँगन छोड़ , और कल तुम्हे रुला कर जाई .
तना कहे के ठुठा है जिया देख जाई . .
छोड़ के तुमरे आँगन कही और घर बसाने जाई ..
हंश के विदा किया , आशीर्वाद दीया लाडली को ..
ताकि आगे ऊहर ज़िन्दगी खुसीयू से भर जाई . .!!
और मोह ना लगा बेतिया से इतना तू बाबुल . .
रघुकुल से ही यह रीत है सदा चली आई
बेटी पराया धन , कल किसी और के घर जाई .||"

माँ की आन, घर की शान,



पिता का गर्व, भाई का मान।


कोयल का गीत, सदियों की रीत।


होती हैं बेटियाँ ~~~


कलियों सी नाज़ुक, फूलों सी कोमल।


पानी सी निर्मल, पूर्वाइ सी शीतल।


होती हैं बेटियाँ ~~~


सज़ा कर हाथो पे मेहंदी,


लगा कर माथे पे बिंदियां।


बन किसी की दुल्हन,


छोङ जाती है अपना आंगन।


ये देख के बार बार सोचे मेरा मन।


अपना या पराया धन, होती हैं बेटियां

betiya


बेटिया तो परायी ये बात हर किसी ने दोहरायी
जिस माँ की लाडली उसकी आँखे भर कइयों आयी
जिस आँगन में खेली उसमें अपनी यादे छोड़े आयी

माँ ने रोते हुए कहा बेटी आज से एक नया रिश्ता ने भाने की बारी आयी
एक नया परिवार बसाना, बाबुल तेरी भी आँखे भर आयी
तूने भी यही कहा , बेटिया तो होती हे परायी |

तो हर किसी ने ये बात दोहरायी , बेटिया तो हे परायी ||

Wednesday, June 23, 2010

betiya


बेटिया

गोद में आती है
खुशियों से वो घर भर जाता है |

उसकी प्यारी मुस्कान से
घर का हर कोना चहकता है |

लाड प्यार में बड़ी होती है
पलकों पे बिठा हर नाता रखता है

कितने नाजों से पलती बेटी
मांगने से पहले सब मिलता है |

बाबुल का दिल का ये टुकड़ा
जो विदाई पे सबको रुला जाता है......

betiya


betiya

 एक मीठी   सी   मुस्कान  हैं  बेटिया.  ...


पर  यह  सच  हैं  की  मेहमान  हैं  बेटिया ....




रहमत  बरकत  साथ  लेती    हैं  यह .   ...


उसकी  रहमत  की  पहचान  हैं  बेटिया ....




उन  किताबों  से  खुशबू  ही  आये  सदा ....


जिन  किताबों  का  उन्वान   हैं  बेटिया ....




तंगहाली  मैं  भी  लैब   न  खोले  कभी ....


सब्र  की  जिंदा  पहचान  हैं  बेटिया ....




उन  घरानों  की  पहचान  बन्ने  चली ....


जिन  घरानों  से  अनजान  हैं  बेटिया ....




सारा  आलम  भी  लिश  कहेगा  यही ....


सारे  आलम  पे  अहसान  हैं  बेटिया ....

Saturday, April 10, 2010


हीन भावना से क्यूँ देखी जाती है बेटियां




क्यूँ हिंसा का शिकार बनती है बेटियां




जन्म से ही पहले ही मारी जाती है बेटियां




क्यों बेटों कि चाहत में मिटा दी जाती है बेटियां !




क्यों डरी सहमी से होती है ये बेटियां




अपने ही घर में क्यूँ पराया होती है बेटियां




घुट_घुट कर क्यूँ जीती है बेटियां




दहेज़ कि बलि क्यों चढ़ जाती है बेटियां!




भेद_भाव को भी सहती है बेटियां




चार दिवारी में क्यूँ कैद रहती है बेटियां



जीना का अधिकार खो जाती है बेटियां



क्यूँ प्यार नहीं पाती है ये बेटियां!






देश का नाम रोशन करती आ रही बेटियां




फिर भी क्यूँ नफरत में जी रही है बेटियां!

Monday, March 29, 2010

betiya


"घणी पियारी लागे है माँ-बाप ने बेटिया|

सुख -दुख में साथ देवे है बेटिया ||

कीयू याने दुख देवो , ये तो नव दुर्गा रो रूप है बेटिया |

देवी रो अससीस है, जो थारे घर जनम लियो ||

माँ रो आशीर्वाद बेटिया ||

इस्सा घणा भाग जो देवी पधारी आपरे आघने ||

धरती रो सिंगार है बेटिया||

माँ-बापू रो अभिमान है बेटिया ||"

Saturday, March 27, 2010


betiya

हर अल्फाज़ का इशारा बेटियाँ

हर खुशी का नजारा बेटियाँ

दिल में बस जाती हैं फूलों की तरह


आँखों में समाती हैं सावन के झूलों की तरह


बनाती हैं सबको अपना नहीं दिखती किसी को कोई झूठा सपना


जो कहती हैं करके वो दिखती हैं


हर ग़लत कदम पर आवाज वो उठाती हैं


फिर भी हर बात पर उन्हें ही क्यों रोका जाता है


फीर भी हर बात पर उन्हें ही क्यों टोका जाता है

Friday, March 19, 2010

betiya

बेटियाँ होती हैं ठंडी - ठंडी हवाएं,



तपते हृदय को शीतल करने वाली बेटियाँ


बेटियाँ होती हैं सदाबहार फूलो सी ,


खिली रहती हैं जीवन भर,मुस्कराती रहती है जीवन भर


रहती हैं चाहे जहाँ, महकाती हैं,सजाती हैं,माता पिता का आँगन


बेटियाँ होती हैं मरहम, गहरे से गहरे घाव को भर देती हैं,


संजीवनी स्पर्श से ,जीते हैं माता पिता,


बेटियों के संसार को सजाने की ललक लिये


बेटियाँ होती हैं, माता पिता के सुनहरे स्वप्न।


पल भर में छोड़ जाती हैं बेटियाँ ,माता पिता का आँगन


लेती हैं उनके धैर्य की परीक्षा।


असहाय माता पिता, ताकते रह जाते हैं,


और चली जाती हैं रोते हुए बेटियाँ,


छोड़ जाती हैं पीछे पल पल की स्मृतियाँ।


माँ स्मृति के पिटारे से निकालती है,


छोटी छोटी फ्रॉकें गुडेगुडिया आँखे नम हो जाती


लगाती हैं उन्हे हृदय से


पिता निहारते हैं उँगलियाँ,


जिन्हे पकड़ा कर


सिखाया था बेटियों को


टेढ़े मेढ़े पाँव रख कर चलना,


कितनी जल्दी बड़ी हो जाती हैं बेटियाँ


कितनी जल्दी चली जाती हैं बेटियाँ

Thursday, March 18, 2010

betiya

नाज़ तुम्हें था बेटे पर,



बोझ लगी थीं बेटियां।


बेटों की सब मांगें पूरीं,


तरस रही थीं बेटियां।


पर तकदीर ने पल्टा खाया,


बोझ के वर्ग में तुम्हें बिठाया।


बेटों को तुम बोझ लगे,


ढोने से कतराने लगे,


तब पलकों पर तुम्हें बिठाने,


तैयार खडी थीं बेटियां।


नाज़ तुम्हें था बेटों पर,बोझ लगीं थीं बेटियां
betiya

ओस की बूँद की तरह होती है बेटिया



प्यार का बंधन छुटे तो रोती है बेटियाँ


रोशन करेगा बेटा बस एक ही कुल को

..दो दो कुलो की लाज रखती है "बेटिया


शायद पल भर में ही



सयानी हो जाती हैं बेटियाँ,


घर के अंदर से


दहलीज़ तक कब


आज जाती हैं बेटियाँ


कभी कमसिन, कभी


लक्ष्मी-सी दिखती हैं ,बेटियाँ।


पर हर घर की


तकदीर, इक सुंदर


तस्वीर होती हैं,  बेटियाँ।


हृदय में लिए उफान,


कई प्रश्न, अनजाने


घर चल देती हैं बेटियाँ,


घर की, ईंट-ईंट पर,


दरवाज़ों की चौखट पर


सदैव दस्तक देती हैं,  बेटियाँ।


पर अफ़सोस क्यों सदैव


हम संग रहती नहीं,  ये बेटियाँ।
betiya

बेटे की जगह जन्म लेती हं बेटियां।



कोमल, सहज व सहृदय होती हैं बेटियां॥


अब बेटे से कहीं कम नहीं है बेटियां।


हर घर का सम्मान है बेटियां॥


देश दुनिया में हर जगह पहचान है बेटियां।


स्वर्णिम दिशा में उडऩे का अरमान है बेटियां॥


न रोके इन्हें कोई, न लगाएं इनपे बेडिय़ां।


क्योंकि अब देश का स्वाभिमान हैं बेटियां॥

betiya

betiya

माँ की आन , घर की शान ,



पिता का गर्व , भाई का मान ।


कोयल का गीत , सदियों की रीत ।


होती हैं बेटियाँ |


कलियों सी नाज़ुक , फूलों सी कोमल ।


पानी सी निर्मल , पूर्वाइ सी शीतल ।


होती हैं बेटियाँ |


सज़ा कर हाथो पे मेहंदी ,


लगा कर माथे पे बिंदियां।


बन किसी की दुल्हन ,


छोङ जाती है अपना आंगन ।


ये देख के बार बार सोचे मेरा मन।


अपना या पराया धन ,होती हैं बेटियां ||

Wednesday, March 17, 2010

betiya


चिड़ि यां,  सी  चहकती , महकते फूल-सी
लगती हौं बेटियां
प्यारी बहुत ही संसार   में
लगती हौं बेटियां।
सातों सुरों  में कूकती, गाती
कोयल-सी बेटिया सातों रंगों को हौं लिए
 तेज किरणों-सी बेटियां।
मां के लिए हौं सुबह  का स्वप्न,
माथे का श्रृंगार बेटियां
बाबुल के लिए जान से भी
प्यारी है, बेटियां।
हंसने से उनके हंसती हौं,
मानों दीवारें घरों की
भइया के सूने हाथ की
राखी हौं बेटियां
पूजा के जलते दीप की
बाती हौं बेटियां
ममता दिखा के सबको
रिझाती हौं बेटियां
रुकते नहीं हौं पैर
पलभर को, जमीं पर
मेहनत की साधी सुगंध
लुटाती हौं बेटियां
गर्मी में ठण्ड की  छांव-सी
लगती हौं बेटियां
सर्दी में मीठी धूप-सी
लगती हौं बेटियां
अविरल बहती  वह धार हौं
गंगा-सी बेटियां
दुनिया-जहां की आग भी
सहती हौं बेटियां
कभी बनीं राधा
कभी दुर्गा भी बन गयीं
दुश्मन के लिए बन गयीं
ये काल बेटियां

betiya


बोए जाते हैं बेटे


उग आती हैं बेटियाँ


खाद-पानी बेटों में


पर लहलहाती हैं बेटियाँ


एवरेस्ट पर ठेले जाते हैं बेटे


पर चढ़ जाती हैं बेटियाँ


रुलाते हैं बेटे


और रोती हैं बेटियाँ


कई तरह से गिराते हैं बेटे


पर सम्भाल लेती हैं बेटियाँ
betiya

मिट्टी की खुशबू-सी होती हैं बेटियां,

घर की  लाज   होती हैं बेटियां, 

बचपन हैं बेटियां, वरदान  हैं बेटियां,

सत्यम्-शिवम् सुंदरम्-सी होती हैं बेटियां,

सूरज-सी खिलखिलाती होती हैं बेटियां,

चंदा की मुस्कुराहट-सी होती हैं बेटियां,

दुर्गा-सी बेटियां, कभी गंगा-सी बेटियां,

हर महिषासुर का वध करने को तैयार बेटियां,

मायके से ससुराल का सफर तय करती हैं बेटियां,

कल्पना में बेटियां, कभी वास्तविकता में बेटियां,


फिर क्यों जला देते हैं ससुराल में बेटियां?
फिर क्यों ना बांटे खुशियां जब होती हैं बेटियां?

एक नहीं दो वंश चलाती हैं बेटियां,
फिर गर्भ में क्यों मार दी जाती हैं बेटियां?
betiya

ना जाने कहां से आ जाती हैं ये बेटियां
कुछ ना हो फिर भी खिलखिलाती हैं बेटियां
ना प्यार की गर्मी और ना चाहत की शीतलता हैं बेटियां
फिर भी जीती जाती हैं बेटियां
अभावों और दबावों के बीच भी ,जीती जाती हैं बेटियां
दिन के दोगुने वेग से बढ़ती जाती है बेटियां
भीड़ भरे मेले में हाथ छूट जाए,
फिर भी किसी तरह घर पहुंच जाती हैं बेटियां
खुद को जलाकर भी ,घरों को रोशन करती जाती हैं बेटियां
सीमाओं के आरपार खुद को फैलाकर ,पुल बन जाती हैं बेटियां
शायद इसकी सजा पाते हुए ,
कोख में ही क्यों   मारी जाती हैं बेटियां ... ।

Wednesday, January 20, 2010

betiya


सुख को जब बाँट भी लेते , दुख जाने क्यू बाँट न पाते ||
अंतर -मन के एक कोने मे , टीस कभी रह जाती है ||
न मै जिसे बता पाता हु , न जुबान कह पाती है|
होते सब दुख दूर तभी, जब माथे को सहेलाती बिटिया ||
नया जोश भर जाता मन मे , जब धीरे मुस्काती बिटिया||
लोग मुर्ख जो मासूमों से , भेदभाव कोई करते है||
जिम्मेदारी बचने को , एक बहाना रचते है||
बेटा - बेटी एक समान ,हमने पाया नारा है|
घर की बगिया में जो महके , सुंदर कोमल फूल है बिटिया ||
मान मेरा , सम्मान बिटिया ,अब मेरी पहचान है बिटिया ||
न मानों तो आकर देखो, माँ बाबा की जान है बिटिया |
मेरी बिटिया सुंदर बिटिया , मेरी बिटिया प्यारी बिटिया ||"
"इतु"राजपुरोहित

betiya

"किसी  पेड की इक डाली को ,नवजीवन  का  सुख देने |
नव  प्रभात  की  किरणों  को ले , खुशियों  से  आँचल भर  देने ||
किसी दूर परियो के  गढ़  से ,नव कोपल  बन आई  बिटिया |
सबके  मन  को भायी बिटिया , अच्छी  प्यारी  सुन्दर  बिटिया ||
आँगन मे  गूंजे  किलकारी  ,  जैसे  सात सुरों  का संगम |
रोना  भी उसका  मन भाये, पर हो जाती  है  आँखे  नम  ||
इतराना  इठलाना   उसको ,मन को  मेरे भाता  है |
हर पीड़ा को भूल  मेरा मन , नए  तराने  गाता है ||
जीवन के  बेसुरे  ताल  मे , राग  भेरवी  लायी  बिटिया  |
सप्त  सुरों  का  लिए  सहारा ,  गीत नया  कोई  गायी बिटिया ||
बस्ते  का वह बोझ  उठा  , काँधे पर  पढ़ने  जाती है |
शाम  पहुचती जब  घर  , हमको  इंतजार  मे पाती है ||
धीरे -धीरे  तुतलाकर  , वह  बात  सभी  बतलाती  है |
राम-रहीम  गुरु  ईसा के , रिश्ते  वह  समझाती  है ||
                                                          
"itu" rajpurohit                      

Friday, January 8, 2010

betiya


मुझसे  ही तो घर  खिलखिलाता   है ,
   फिर क्यों  मुझे मार दिया  जाता  है ....?
   ये दुनिया नहीं  चल  सकती  मुझ बिन
   फिर क्यों  मुझे दुनिया मे आने  से
   रोक  दिया जाता  है ...?
   जेसे  बेटा  घर का  चिराग  है ,
   मै भी  तो  उसी  घर की रोशनी  हू |
   लड़का - लड़की  मे भेद  नहीं ,
   ये  क्यों  नहीं समझा  जाता  है |     "itu"

Monday, December 28, 2009

betiya


घर -भर को जनत बनाती है बेटिया
अपनी तबसुम से इसे जनत बनाती है बेटिया
छलकती है अस्क बनके माँ के दर्दे से
रोते हुए भी बाबुल को हसाती है बेटिया
सुबह की सुहानी धुप सी प्यारी लागे है बेटिया
मंदिर के दिये की बाती है बेटिया
सहती है दुनिया के सारे गम
फिर भी सभी रिश्ते निभाती है बेटिया
बेटे देते है माँ -बाप को आंसू उन आसुओ को सहेजती है बेटिया
फूल सी बिखेरती है चारो और खुसबू ,फिर भी न जाने क्यू जलाई जाती है बेटिया
                                                                                                                              "itu"

Saturday, December 26, 2009

बेटिया


सुरज की तेज किरन है बेटिया ,चाँद की शीतल छाव है बेटिया


झिलमिल तारों सी झिलमिलाती झालर है ,दुनिया की सोगात है बेटिया


कोयेल की कुक है संगीत की सरगम है ,पायल की झंकार है बेटिया


सात सुरों की सरगम है, वीणा की झंकार है बेटिया


घर - आँगन की मुस्कान है ,लक्ष्मी का वरदान है बेटिया


माँ -बाप और परिवार की शान है ,इन सबो की जान है बेटिया


इंदिरा , लक्ष्मी बाई,जिजाबाई जेसी महान है हमारी बेटिया


सेना हो या और कोई क्षेत्र ,आगे बढ़ने को है तेयार है बेटिया


सुरज सी तेज किरन है बेटिया ,चाँद की शीतल छाव है बेटिया ""           "itu"